बदल जाते हैं


देखते हैं की हर शय हर वक़्त बदल जाते हैं

बदलता नहीं इश्क़ , पर इसके घर बदल जाते हैं

पढ़ना है तो दिलों को पढ़ने का हुनर सीखो

कागज़ तक आते आते , मतलब बदल जाते हैं

ये अश्क हैं मेरे, तुम पानी न समझो

खुसी, गम, बेबसी न जाने क्या-क्या इसमे बह जाते हैं

नदी ही रहने दो, मुझे  नहीं मिलना है सागर मे

मिलने से ताउम्र साथ चले किनारे भी बदल जाते हैं

सुना है बदल गए हैं उनके मिज़ाज भी ओहदे के साथ

‘आलोक’ क्यूँ न बदले, मौसम के साथ फूल-ओ-खुशबू बदल जाते हैं

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2 Comments (+add yours?)

  1. Anoop Kumar
    Aug 31, 2011 @ 11:49:40

    I never knew that you are a poet too………….great work, post a few more…..

    Reply

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