hamsafar


मैं अब क्या कहूँ मुझे किसकी तलाश है,
मंज़िले मेरे संग चलें मेरा हमसफ़र मेरे साथ है ।

मौत में ही है ज़िंदगी और ज़िंदगी में मौत है,
ये सफ़र यूँ चला करे, मेरे हाथ में तेरा हाथ है ।

ये तब्बसुम, वो हँसी और रूठ जाना तेरा,
सब ख़ज़ाने मेरे है फिर क्या दिन क्या रात है।

ऐ दिल की धड़कन सुनो, ये ग़ज़ल मेरी पढ़ो,
‘चाह’ क्या चाहे है अब, इसमें ही वो बात है ।

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